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Friday, December 17, 2010

जरा सोचिये कि जो फैसला सोनिया गाँधी ने 1968 में अपने माता-पिता का विरोध करके राजीव जी के साथ शादी करने का लिया था अर्थात देश और परिवार दोनों छोड़ने का फैसला.और आज हममे से कितने लोग इस तरह का फैसला कर पाते हैं,प्रेम तो हम भी करते हैं लेकिन निर्णय के समय माँ -बाप के विरोध के पल्लू का सहारा लेकर प्रेम की सारी कसमें-वादे पल भर में तोड़ देते हैं.क्या होता है कैसा होता होगा वो प्रेम जो किसी को देश और परिवार छोड़ने को मजबूर कर देता है......... 'माता-पिता सोनिया की शादी के ख़िलाफ़ थे'

'माता-पिता सोनिया की शादी के ख़िलाफ़ थे'

सोनिया गांधी के माता-पिता राजीव गांधी के साथ उनकी शादी के ख़िलाफ़ थे लेकिन सोनिया ने उनका विरोध किया और अपनी मर्ज़ी से शादी की.
विकीलीक्स के अनुसार सोनिया ने अपनी ये निजी बातें कैलिफ़ोर्निया के पूर्व गवर्नर आर्नल्ड स्वार्ज़नेगर की पत्नी मारिया श्राइवर को एक घंटे की मुलाक़ात के दौरान बताई थीं.
भारत में अमरीकी दूतावास के एक अधिकारी ने चार अगस्त, 2006 को ये उस मुलाक़ात की पूरी जानकारी वाशिंगटन भेजी थी.
विकीलीक्स पर जारी उस केबल में लिखा गया है कि आमतौर पर सार्वजनिक ज़िंदगी में रिज़र्व रहने वाली सोनिया ने मारिया श्राइवर के साथ काफ़ी खुलकर बात की.

'बाध्य होकर राजनीति में आईं'

अपनी राजनीतिक ज़िंदगी की बात करते हुए उन्होंने कहा कि “भारत में दक्षिणपंथ काफ़ी मज़बूत हो रहा था और कांग्रेस कमज़ोर”...और इसीसे गांधी परिवार की धरोहर को बचाने के लिए उन्हें “बाध्य” होकर राजनीति में कूदना पड़ा.
लीक हुई केबल के अनुसार सोनिया ने ये भी बताया कि उनके बच्चे इस कदम के पूरी तरह से हक़ में नहीं थे लेकिन फिर बाद में उन्होंने कहा, “आप जो भी फ़ैसला करेंगी, हम आपके साथ हैं.”

दस्तावेज़ के अनुसार सोनिया ने कहा कि प्रधानमंत्री पद नहीं स्वीकार करने के पीछे की पूरी कहानी पर कभी वो किताब लिखेंगी.
प्रधानमंत्री का पद ठुकराने के फ़ैसले की वजह पर वो बहुत खुलकर नहीं बोलीं.
विकीलीक्स के अनुसार उनका कहना था, “मुझसे अक्सर इस बारे में पूछा जाता है लेकिन आप लोगों से कह सकती हैं कि किसी दिन इस पूरी कहानी पर मैं किताब लिखूंगी.”
उन्होंने बस इतना कहा कि उन्हें “अच्छा लगा” जब कोई और प्रधानमंत्री बन गया और उन्हें अपने फ़ैसले पर “कोई अफ़सोस नहीं है”.
उन्होंने ये भी कहा कि उनपर पार्टी कार्यकर्ताओं का ख़ासा दबाव था क्योंकि वो समझ नहीं पा रहे थे कि जब जनता ने उनके लिए वोट किया है तो फिर वो पद क्यों नहीं स्वीकार कर रही हैं.
मारिया श्राइवर उनसे महिलाओं से जुड़ी समस्याओं पर बात करने भारत आई थीं और तीन अगस्त को उन्होंने सोनिया से मुलाक़ात की.
अमरीकी दूतावास के अधिकारी ने वाशिंगटन को भेजी गई अपनी निजी टिप्पणी में लिखा है कि अपने पारिवारिक हादसों के बाद सोनिया गांधी ने अपने इर्द गिर्द एक ऐसा व्यक्तित्व खडा़ किया है जो उनकी निजी ज़िंदगी में सार्वजनिक पैठ को रोकता है.
टिप्पणी के अनुसार जब भी उन्होंने अपने पति या सास की मृत्यु की बात की उन्हें अपनी भावनाओं को काबू में रखने के लिए संघर्ष करना पड़ा.
दूतावास के अधिकारी के अनुसार, “बेहद सावधानी से बनाई भारतीय छवि के बावजूद, उनका इतालवी व्यक्तित्व बेहद स्पष्ट रूप से उनकी आदतों, बातों, हाव भाव और रूचियों में झलकता है.”

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