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Tuesday, December 21, 2010

जानिए क्या है जे.पी.सी. और पी.ए.सी.






                   क्‍या है जेपीसी?




2 स्‍पेक्‍ट्रम आवंटन घोटाले को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस हो रही है. विपक्ष इस घोटाले की जांच जेपीसी से कराना चाहता है तो सरकार कह रही है कि इस घोटाले की पीएसी करने में सक्षम है. तो जानते हैं आखिर क्‍या है जेपीसी?





जेपीसी अंग्रेजी अक्षर के JPC से बना है, जिसका पूरा मतलब होता है. ज्‍वाइंट पार्लियामेंटरी कमेटी. ज्‍वाइंट पार्लियामेंटरी कमेटी संसद की वह समिति जिसमें सभी दलों को समान भागीदारी हो. जेपीसी को यह अधिकार है कि वह किसी भी व्‍यक्ति, संस्‍था या किसी भी उस पक्ष को बुला सकती है जिसको ले‍कर जेपीसी का गठन हुआ है.





अगर वह जेपीसी के समक्ष पेश नहीं होता है तो यह संसद की अवमानना का उल्‍लघंन माना जाएगा. जेपीसी संबंधित व्‍यक्ति या संस्‍था से इस बाबत लिखित या मौखिक जवाब या फिर दोनों मांग सकती है.
भारतीय संसद के इतिहास में अब तक 4 बार जेपीसी का गठन हो चुका है.





6 अगस्‍त 1987 को पहली बार बोफोर्स घोटाले को लेकर पहली बार जेपीसी का गठन हुआ.





6 अगस्‍त 1992 को दूसरी बार तब जेपीसी का गठन हुआ जब हर्षद मेहता का शेयर घोटाले की जांच करनी थी.
26 अप्रैल, 2001 को एक बार फिर शेयर बाजार में हुए घोटाले के कारण जेपीसी का गठन हुआ.





अगस्‍त 2003 में चौथी और अंतिम जेपीसी का गठन भारत में बनने वाले सॉफ्ट ड्रिंक्‍स और अन्‍य पेय पदार्थों में कीनटाशक होने की जांच के लिए किया गया था.
                 क्‍या है पीएसी?

2 स्‍पेक्‍ट्रम आवंटन घोटाले को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस हो रही है. विपक्ष इस घोटाले की जांच जेपीसी से कराना चाहता है तो सरकार कह रही है कि इस घोटाले की पीएसी करने में सक्षम है. तो जानते हैं आखिर क्‍या है पीएसी?





पीएसी अंग्रेजी अक्षर के PAC से बना है, जिसका पूरा मतलब होता है. पब्लिक अकाउंट्स कमेटी. पब्लिक अकाउंट्स कमेटी यानि खर्चे का हिसाब-किताब देखने वाली कमेटी. इस कमिटी का अध्यक्ष विपक्ष का नेता होता है.
पीएसी कैग की रिपोर्ट की जांच करती है. पीएसी द्वारा तैयार की गई सिफारिश को सरकार मानने के लिए बाध्‍य नहीं है. शायद यही कारण है कि विपक्ष पीएसी नहीं जेपीसी की मांग कर रहा है. वैसे भी भाजपा के लिए पीएसी बहुत शुभ नहीं रहा है.
पहले जसवंत सिंह जी इसके अध्यक्ष बने, तो वह अपनी किताब लेकर एक तरफ खड़े हो गए और पार्टी दूसरी तरफ. अंतत: पार्टी से निकाले गए, जो फिर भाजपा में शामिल हो चुके हैं. लेकिन अब मुरली मनोहर जोशी इसके अध्यक्ष हैं, जो सरकार के पीएसी के सुर में सुर मिलाते हुए कह रहे हैं कि 2 जी स्‍पेक्‍ट्रम घोटाले की जांच करने के लिए पीएसी सक्षम है.

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