अमित जी! एक अच्छे कानून से फर्क पड़ता है जैसे सूचना के अधिकार को ले लीजिये,हम सभी इस बात को मानते हैं कि इस कानून के बनने से बहुत फर्क पड़ा है.लोकपाल बिल बनने से corruption खत्म नहीं हो जायेगा लेकिन हम सभी को भ्रष्ट लोगों के खिलाफ लड़ने के लिए एक अस्त्र जरुर मिल जायेगा.और मान भी लीजिये कि कुछ भी नहीं बदलेगा तो भी हाथ पर हाथ रखकर बैठे रहने से भी तो कुछ नहीं होने वाला है.हम लोगों ने एक अँधेरी कोठरी में उम्मीद कि एक लौ तो जला ही दी है.आप यह भी सही कह रहे हैं कि हम में से अधिकांश लोग भ्रष्टाचार में लिप्त हैं.मैं भी कोई बहुत इमानदार आदमी नहीं हूँ,तो क्या करू जीवन भर भ्रष्ट बना रहूँ.क्या मेरा या आप का सुधरना गुनाह है?अब तक हमने गलत किया है तो क्या इसे सिर्फ आगे भी जारी रखें कि क्योंकि भूत में हमने गलत किया है इसलिए भविष्य में हमें ईमानदार व्यक्ति होने का कोई अधिकार नहीं है? आप सही कह रहे हैं कि भ्रष्ट नेताओं को संसद या विधान मंडल में हमने ही पहुँचाया है क्योंकि चुनाव के समय हम जाति,धर्म,क्षेत्र आदि में बंट जाते हैं तब हम किसी अच्छे नेता का चुनाव नहीं करते हैं.लेकिन अब हमे यह सब बंद करना है.अब तक जो हुआ सो हुआ,अब आगे उसे जारी नहीं रखना है.शुक्रिया.
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