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Tuesday, December 14, 2010

नरेगा कोष के दुरुपयोग पर केंद्र को SC की लताड़

                                            नरेगा कोष के दुरुपयोग पर केंद्र को SC की लताड़
नई दिल्ली, 13 दिसम्‍बर 10 (एजेंसी) । सर्वोच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (नरेगा) के तहत आवंटित कोष का राज्यों द्वारा किए जा रहे दुरुपयोग को न रोक पाने के लिए सोमवार को केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया।
प्रधान न्यायाधीश एसएच कपाड़िया की अध्यक्षता वाली सर्वोच्च न्यायालय की पीठ ने गैर सरकारी संगठन, सेंटर फॉर एनवायर्नमेंट एंड फूड सिक्युरिटी द्वारा दायर याचिका की सुनवाई करते हुए कहा, ''यह एक बहुत ही गंभीर मुद्दा है।''
मुख्य न्यायाधीश ने उड़ीसा में ग्रामीण रोजगार योजना मनरेगा के धन की हेरा-फेरी से संबंधित मामले की सुनवाई करते हुए उसकी केंद्रीय जांच कराने का समर्थन किया। कपाडिया की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि हम इस मामले को गंभीरता से ले रहे हैं। हम केंद्र को धन की हेरा-फेरी की जांच करने का निर्देश देंगे। एक निश्चित अवधि के भीतर रिपोर्ट जमा करनी होगी और तब हम मुख्य सचिव को बुलाएंगे। हम जमीनी हकीकत पर कार्रवाई चाहते हैं।
पीठ ने कहा कि धन की हेरा-फेरी और मनरेगा को लागू नहीं करने के आरोप गंभीर प्रकृति के हैं। मनरेगा के तहत केंद्र सरकार की ओर से राज्यों को सालाना 40 हजार करोड़ रुपए जारी किए जा रहे हैं। पीठ ने मामले में आदेश सुनाने के लिए अगली तारीख गुरुवार को निर्धारित की है।
पीठ ने कहा कि उड़ीसा सरकार खुद कह रही है कि कुछ अधिकारियों को निलंबित किया गया है। इसका मतलब है आरोपों में सच्चाई है। पीठ में शामिल न्यायमूर्ति केएस राधाकृष्णन और न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार ने मामले पर खीझ व्यक्त किया।
पीठ ने केंद्र की ओर से उपस्थित वरिष्ठ अधिवक्ता टीएस दाओबिया से कहा कि वे मामले की जांच करें। पीठ ने कहा कि आप धन दे रहे हैं लेकिन आप कदम नहीं उठा रहे हैं। सारा धन बर्बाद हो रहा है। पीठ ने केंद्र से यह भी जानना चाहा कि उड़ीसा से संबंधित आरोपों पर वह क्या कदम उठाना चाहता है।
शीर्ष अदालत ने एक गैर सरकारी संस्था सेंटर फॉर एन्वायरमेंट एंड फुड सेक्युरिटी की ओर से साल 2007 में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में मनरेगा को लागू करने में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया गया है।

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